श्रीअरविंद

आध्यात्मिक स्वप्न

जब किसी साधक को आध्यात्मिक सत्य के स्वप्न आते हैं तो क्या इसका यह अर्थ नहीं होता कि उसकी प्रकृति…

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संभावना

जो लोग पूरी तरह सांसारिक जीवन में फंसे रहते हैं और कठिनाई या विपत्ति के समय ही भगवान को याद…

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अपना वातावरण

... परिवेश का निश्चय ही व्यक्ति पर प्रभाव पड़ता है... यही कारण है कि तुम जहां रहो वहाँ अपना एक…

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प्रार्थना कैसे करें ?

भगवान हृदय में देखते हैं और जब समझते हैं कि अब ठीक समय आ गया है, तब पर्दा हटा देते…

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तुम्हारा जीवन

यह समझो कि तुम्हारा जीवन तुम्हें केवल भागवत कर्म के लिए और भागवत अभिव्यक्ति में सहायता देने के लिए दिया…

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काम में रस

आपने लिखा था, "काम में रस होना चाहिये। " लेकिन मैं पूर्ण रस या मजा नहीं ले पाता।  कार्य की…

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आश्रम की सीमाएं

आश्रम का परिवेश, उसकी सीमाएं क्या हैं ? वह प्रत्येक घर जिसमें साधक रहते हैं आश्रम की सीमा के अंदर…

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आध्यात्मिक जीवन की पहली आवश्यकता

...विनम्रता पहली आवश्यकता है, क्योंकि जिसमें अहंकार और घमण्ड है वह परम या उच्चतम की सिद्धि नहीं पा सकता। संदर्भ…

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पूर्ण योग कोई नहीं कर सकता

यह कहा जा सकता है कि मैं पूर्णयोग कर रहा हूँ ? प्रत्येक व्यक्ति जो श्रीमाँ की ओर मुड़ा है, …

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वैराग्य का प्रशिक्षण

न कोई आनंद, न बल। पढ़ने-लिखने की इच्छा भी नहीं होती-मानो कोई मुर्दा आदमी चल - फिर रहा हो। आप…

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