श्री माँ के वचन

श्रीअरविंद से मिलना

श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे मिलती हूं। कल रात मैंने…

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उपस्थिति का अनुभव

हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की अतिशयता ही तुम्हें मेरी उपस्थिति…

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ध्यान कहाँ?

मधुर माँ , यहाँ  अपने कमरे में बैठ कर ध्यान करने और सबके साथ खेल के मैदान में ध्यान के…

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प्रगतिशील बनों

कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के अधिक निकट आना। हर गुजरता…

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केवल एक सहारा

भगवान के सिवा कभी किसी दूसरे मनुष्य या दूसरी वस्तु पर, वह चाहे जो हो निर्भर नहीं करना। कारण, यदि…

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दूसरें लोग आईना है

जब कोई बात दूसरे व्यक्ति के अन्दर तुम्हें एकदम अवांछनीय या हास्यास्पद प्रतीत हो -- जब तुम सोचो : ''यह…

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भय को स्वीकृति

भय गुप्त स्वीकृति है । जब तुम किसी चीज़ से डरते हो तो इसका या अर्थ है कि तुम उसकी…

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अपने-आपको बुरा भला कहना

  क्या अपने-आपको  बुरा-भला  कहना प्रगति करने का अच्छा उपाय है ?   अपने-आपको बुरा भला कहना ? नहीं ,ज़रूरी…

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अब क्या होने-वाला है?

हम इस समय फिर एक बार पृथ्वी के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ पर हैं। सब ओर से लोग मुझसे…

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भारत की भूमिका

वर्तमान राजनीति में भारत को क्या कोई विशेष भूमिका निभानी है ? . . . भारत को जगत में एक…

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