भगवान हृदय में देखते हैं और जब समझते हैं कि अब ठीक समय आ गया है, तब पर्दा हटा देते हैं। तुमने भक्ति के सिद्धान्त पर बल दिया है कि हमें केवल उनका नाम लेने कि जरूरत है और उन्हें अवश्य उत्तर देना चाहिये। उन्हें तुरंत वहाँ आ जाना चाहिये। शायद, किन्तु यह किसके लिए सत्य हैं ? निस्संदेह एक विशेष प्रकार के भक्त के लिए जो नाम की शक्ति को अनुभव करता है, जिसमें नाम का आवेग है और जिसे वह अपनी पुकार में व्यक्त करता है । यदि कोई वैसा भक्त हो तब तत्काल उत्तर आ सकता है- यदि नहीं; तब हमें वैसा बनना पड़ेगा। तभी उत्तर आयेगा।
संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र
तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…
अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…
तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…
श्रीअरविंद ने कितनी ही बार इस बात को दोहराया है कि परमात्मा हास्यप्रिय हैं और…