… परिवेश का निश्चय ही व्यक्ति पर प्रभाव पड़ता है… यही कारण है कि तुम जहां रहो वहाँ अपना एक वातावरण बना लो (निश्चित रूप से उचित तरीके का वातावरण) और उसे बनाये रखो, तब तुम देखोगे कि सभी दूसरे अनुचित स्पंदन वातावरण से झड़ जायेंगे।
संदर्भ : श्रीअरविंद अपने विषय में
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…
जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…
हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर 'अनन्तता' के…