इन छोटी-छोटी बातों से क्यों उत्तेजित हो जाते हो? या उनसे अपने को क्यों विचलित होने देते हो? यदि तुम…
जिस चीज़ से मनुष्य डरता है, वह तब तक आते रहने की प्रवृत्ति रखती है, जब तक की मनुष्य सीधे उसके…
अपनी सभी गतिविधियां में संकल्प के पूर्ण समर्पण के माध्यम से भागवत उपस्थिती तथा शक्ति के साथ अपनी आत्मा का…
श्रीमाँ की ओर खुले रहने का तात्पर्य है बराबर शांत-स्थिर और प्रसन्न बने रहना तथा दृढ़ विश्वास बनाये रखना न…
भारत का मिशन या जीवन-लक्ष्य है मानवता को मानव-स्वातन्त्र्य, मानव-समानता, मानव-भ्रातृत्व के सच्चे उद्गम की ओर पुनः निर्देशित करना। जब…
जो 'सर्वोच्च है उसके साथ तुम्हारी सत्ता का सब प्रकार से एक हो जाना—यह योग है। जो अखिल है उसके…
..... ऐक्य के तीन स्वरूप हैं। एक ऐक्य तादात्म्य के द्वारा आध्यात्मिक सत्त्व में होता है; एक अन्य प्रकार का…
केवल थे सुरक्षित जिन्होने सँजोये रखा भगवान को अपने हृदय में अपने: साहस की ढाल और श्रद्धा का लेकर कृपाण,…
(अधिकतर साधक) अहंकारी होते हैं और वे अपने अहंभाव को अनुभव या स्वीकार नहीं करते। उनकी साधना में भी 'मैं'…
यदि चैत्य पुरुष की प्रकृति जाग्रत हो जाए, अपने पीछे विद्यमान माताजी की चेतना और शक्ति के द्वारा तुम्हारा पथ-प्रदर्शन…