यह समझो कि तुम्हारा जीवन तुम्हें केवल भागवत कर्म के लिए और भागवत अभिव्यक्ति में सहायता देने के लिए दिया गया है। पवित्रता, शक्ति, प्रकाश, विशालता , निश्चलता, दिव्य चेतना के आनंद के अतिरिक्त अन्य किसी भी चीज़ की कामना न करो तथा इस बात पर आग्रह करो कि वह चेतना तुम्हारें मन, प्राण तथा शरीर को रूपांतरित करें और उन्हें पूर्ण बनाये।

संदर्भ : मानव चेतना के आधार 

शेयर कीजिये

नए आलेख

श्रीमाँ को स्वप्न में देखना

मधुर माँ, क्या नींद में अपने ऊपर पूरी तरह नियंत्रण पाना संभव है ? उदाहरण…

% दिन पहले

सर्वोत्तम उदाहरण

व्यापक दृष्टि से विचार करने पर मुझे ऐसा लगता है कि प्रचार करने योग्य सबसे…

% दिन पहले

सच्ची वीरता

तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…

% दिन पहले

अच्छी नींद के लिए

अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…

% दिन पहले

भय और बीमारी

तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…

% दिन पहले

सच्ची करुणा

साधक को क्या होना चाहिये इसके बारे में मैं तुम्हारे भावों की कदर करती हूँ…

% दिन पहले