यह समझो कि तुम्हारा जीवन तुम्हें केवल भागवत कर्म के लिए और भागवत अभिव्यक्ति में सहायता देने के लिए दिया गया है। पवित्रता, शक्ति, प्रकाश, विशालता , निश्चलता, दिव्य चेतना के आनंद के अतिरिक्त अन्य किसी भी चीज़ की कामना न करो तथा इस बात पर आग्रह करो कि वह चेतना तुम्हारें मन, प्राण तथा शरीर को रूपांतरित करें और उन्हें पूर्ण बनाये।
संदर्भ : मानव चेतना के आधार
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…
जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…
हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर 'अनन्तता' के…