आपने लिखा था, “काम में रस होना चाहिये। ” लेकिन मैं पूर्ण रस या मजा नहीं ले पाता।
कार्य की उत्तम अवस्था है कि तुम जो कर रहे हो उसमें रस लो – लेकिन उत्तम अवस्था हमेशा तुरंत पाना संभव नहीं होता ।
संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र एक युवा साधक के नाम
जीवनयात्रा में समस्त भय, संकट और विपदा का सामना करने के लिए कवच के रूप…
अपने तुच्छ, स्वार्थपूर्ण व्यक्तित्व से बाहर निकलो ओर अपनी भारतमाता के योग्य शिशु बनो ।…