जब किसी साधक को आध्यात्मिक सत्य के स्वप्न आते हैं तो क्या इसका यह अर्थ नहीं होता कि उसकी प्रकृति का रूपांतर हो रहा है ?
जरूरी नहीं है। इससे यह मालूम होता है कि वह साधारण लोगों से ज्यादा सचेतन है, परंतु स्वप्न प्रकृति को नहीं बदल सकते ।
संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
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