आश्रम का परिवेश, उसकी सीमाएं क्या हैं ? वह प्रत्येक घर जिसमें साधक रहते हैं आश्रम की सीमा के अंदर हैं । बड़ी अजीब बात है कि लोग यह मानते है और कहते हैं कि आश्रम के अहाते में जितने घर है बस वही आश्रम का दायरा है – यह एकदम बेतुकी बात है। या फिर क्या वे सोचते है कि श्रीमाँ या मेरा प्रभाव बस इसी अहाते में ही सीमित है ?
संदर्भ : श्रीअरविंद अपने विषय में
श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…