तुम किसी से …

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प्रातः पुष्प वितरण के समय श्रीमाँ को लगभग दो घंटे एक ही स्थान पर खड़े रहना पड़ता था। एक दिन…

सत्य को जीना

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सत्य लकीर की तरह नहीं सर्वांगीड है, वह उतरोत्तर नहीं बल्कि समकालिक है। अतः उसे शब्दो में व्यक्त नहीं किया…

दाँत ढीले कर दिये

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मोनिका चंदा अपने दोनों नेत्रों की दृष्टि खो बैठी थी। फिर भी यह वृद्ध भक्त-साधक महिला अपने वैभवमय जीवन को…

आवश्यकता या चाह

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यदि अपनी कामनाओं के पीछे-पीछे चलना ही एकमात्र करने-योग्य कार्य होता तो निश्चय ही यह बड़ा आसान होता; परंतु अपनी…

तुम्हें मजबूत बनना है

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लता जौहर का एक भाई नरेंद्र किसी काम से मद्रास गया था। वहाँ पहुँचकर अचानक ही वह बहुत बीमार हो…

व्यवस्था

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काम में व्यवस्था और सामंजस्य होने चाहियें। जो काम यूं देखने में बिलकुल नगण्य हो उसे भी पूर्ण पूर्णता के…

प्रभु की मुस्कान

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२६ नवम्बर १९२६ को श्रीअरविंद ने अपने कक्ष में एकांतवास आरंभ कर दिया। इसके बाद वे आरंभ में वर्ष में…

पशु-पक्षियों के प्रति अनुकम्पा

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श्रीअरविंद थे परम करुणामय। वे पशु-पक्षियों तक की सुविधा-असुविधा का ध्यान रखते थे। कभी-कभी एक बिल्ली आकार आराम से उस…

कठिनाइयाँ और विपत्तियाँ

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श्रीमाँ ने अपनी एक सहायिका से कहा था, "बहुत से लोग जब यहाँ आते है तब जो वस्तु उन्हें अशांत…

प्रकृति का विधान

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प्रकृति का ऐसा कोई विधान नहीं हैं जिसका अतिक्रमण न किया जा सके या जिसे बदला न जा सके, केवल…