प्रकृति का ऐसा कोई विधान नहीं हैं जिसका अतिक्रमण न किया जा सके या जिसे बदला न जा सके, केवल हमारे अंदर यह विश्वास होना चाहिये कि भगवान ही सब पर शासन करते हैं और यदि, हम अपने सहस्त्र वर्षों के पुराने अभ्यासों के बंदीगृह से निकलना और अपने-आपको ‘उनकी’ इच्छा पर पूर्ण रूप से छोड़ना सीख सकें तो हमारा ‘उनके’ साथ सीधा संपर्क हो सकता है ।
संदर्भ : विचार और सूत्र के संदर्भ में
भगवान के प्रति पूर्ण आत्म-दान के लिए तीन विशेष विधियाँ : (१) सारे गर्व को…
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हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…