श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

सत्य को जीना

सत्य लकीर की तरह नहीं सर्वांगीड है, वह उतरोत्तर नहीं बल्कि समकालिक है। अतः उसे शब्दो में व्यक्त नहीं किया जा सकता उसे जीना होता है ।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)

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