केवल थे सुरक्षित जिन्होने सँजोये रखा भगवान को अपने हृदय में अपने:
साहस की ढाल और श्रद्धा का लेकर कृपाण, उन्हें चलना होगा ,
भुजाएँ प्रहार के लिए तत्पर, आँखें करें शत्रु की टोह,
करते हुये निक्षेपित बरछा सामने ध्यान से ,
प्रकाश की सेना के नायक और सैनिक।
संदर्भ : ‘सावित्री’
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…
जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…
हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर 'अनन्तता' के…