केवल थे सुरक्षित जिन्होने सँजोये रखा भगवान को अपने हृदय में अपने:
साहस की ढाल और श्रद्धा का लेकर कृपाण, उन्हें चलना होगा ,
भुजाएँ प्रहार के लिए तत्पर, आँखें करें शत्रु की टोह,
करते हुये निक्षेपित बरछा सामने ध्यान से ,
प्रकाश की सेना के नायक और सैनिक।
संदर्भ : ‘सावित्री’
जीवनयात्रा में समस्त भय, संकट और विपदा का सामना करने के लिए कवच के रूप…
अपने तुच्छ, स्वार्थपूर्ण व्यक्तित्व से बाहर निकलो ओर अपनी भारतमाता के योग्य शिशु बनो ।…
सारी समस्या का निचोड़ यह है : बुद्धि के मानसिक प्रशासन की जगह आध्यात्मिक चेतना…