अगर लोगों को पूर्ण होने की वजह से काम को बंद कर देना पड़े तो हर व्यक्ति को पूरी तरह काम बंद कर देना पड़ेगा । हमें अपने काम में ही प्रगति करनी और शुद्धि प्राप्त करनी होगी।
तुम जो कुछ काम कर रहे हो उसे जारी रखो, लेकिन यह कभी न भूलो कि तुम जो कर रहे हो उसे ज़्यादा अच्छी तरह किया जा सकता है और उसे करना भी चाहिये।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…