क्या यह हो सकता है कि एक व्यक्ति जो श्रीअरविंद की ओर खुला है, माँ की ओर खुला न हो ? क्या यह बात ठीक है कि जो कोई भी श्रीमाँ की ओर खुला हो , वह श्रीअरविंद की ओर भी खुला है ?
श्रीमाँ के बारे में कथन सही है। यदि कोई श्रीअरविंद की ओर खुला है, लेकिन माताजी की ओर नहीं, तो उसका अर्थ यह है कि वास्तव में वह श्रीअरविंद की ओर भी खुला हुआ नहीं हैं ।
संदर्भ : माताजी के विषय में
क्या अपने-आपको बुरा-भला कहना प्रगति करने का अच्छा उपाय है ? अपने-आपको बुरा भला-भला…
मधुर माँ, हम स्वप्न में अच्छे और बुरे में कैसे फ़र्क़ कर सकते हैं। सिद्धांत…
(अधिकतर साधक) अहंकारी होते हैं और वे अपने अहंभाव को अनुभव या स्वीकार नहीं करते।…