हमारी बाहरी घटनाओं के कारण-बीज हमारे अन्तर में हैं,
और इस उद्देश्यहीन दैवनियति का भी है जो विधि के संयोगसम दिखती है,
हमारी बौद्धिकता से परे परिणामों का यह अम्बार,
उन सत्यों का मूक रेखांकन है जो अगोचर कार्य करते हैं:
परम-अज्ञेय के ये विधान द़ृश्य-सृष्टि की रचना करते हैं।
संदर्भ : “सावित्री”
तुम्हें जो चीज़ जाननी चाहिये वह है, ठीक तरह से यह जानना कि तुम जीवन…
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…
जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…