तुम्हें जो चीज़ जाननी चाहिये वह है, ठीक तरह से यह जानना कि तुम जीवन में क्या करना चाहते हो । इसे सीखने में जो समय लगता है उसकी कुछ परवाह नहीं क्योंकि जो लोग ‘सत्य’ के अनुसार जीना चाहते हैं, उनके लिये हमेशा कुछ सीखने के लियें, कुछ प्रगति के लिए होता ही हैं ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
भूल या सजा देने का कोई प्रश्न ही नहीं है-अगर लोगों को हम उनकी भूलों…
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जो श्रद्धा वैश्व भगवान के प्रति जाती है वह लीला की आवश्यकताओं के कारण अपनी…
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