अधः लोक की अन्ध शक्तियाँ

अब भी किन्तु प्रबल हैं।

आरोहण की गति धीमी है,

लम्बा बहुत समय है।

तब भी सत्य उठेगा ऊपर,

तब भी शान्ति बढेगी,

आयेगा वह दिन जन-जन

हिलमिल जब एक बनेंगे।

इसीलिए तो एक क़दम

बढ़ना भी बड़ी विजय है।

ज़रा-ज़रा कर दिव की ओर

मही को मुड़ना होगा।

धूमिल आत्मा एक रोज़

ज्योतिर्जग में जागेगी।

 

सन्दर्भ : सावित्री 

शेयर कीजिये

नए आलेख

उपस्थिति का अनुभव

हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…

% दिन पहले

ध्यान कहाँ?

मधुर माँ , यहाँ  अपने कमरे में बैठ कर ध्यान करने और सबके साथ खेल…

% दिन पहले

प्रगतिशील बनों

कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…

% दिन पहले

केवल एक सहारा

भगवान के सिवा कभी किसी दूसरे मनुष्य या दूसरी वस्तु पर, वह चाहे जो हो…

% दिन पहले

श्रीमाँ के बालक

तुम माँ के बच्चे हो और माँ का अपने बच्चों के प्रति प्रेम असीम होता…

% दिन पहले

कामनाएँ

यदि अच्छी कामनाएँ हैं तो बुरी कामनाएँ भी आयेंगी। संकल्प और अभीप्सा तो साधना के…

% दिन पहले