अपने अन्तर में हम सतत एक जादुई चाबी छिपाये रहते हैं
यह जीवन के प्राण-रुद्ध एक खोल में बन्द है।
संदर्भ : “सावित्री”
भगवान के प्रति पूर्ण आत्म-दान के लिए तीन विशेष विधियाँ : (१) सारे गर्व को…
श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…