हमने जो सब सीखा है एक शंका भरे अनुमान जैसा है
सब सफलताएं एक पथ या एक अवस्था सम दीखती हैं
जिसका अग्रिम छोर हमारी द़ृष्टि से छिपा है,
एक अनायास घटित घटना या एक दैव नियति लगती है।
संदर्भ : “सावित्री”
भूल या सजा देने का कोई प्रश्न ही नहीं है-अगर लोगों को हम उनकी भूलों…
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