इन भौतिक क्रियाओं को इतना अधिक महत्व क्यों दिया जाये ? ज्यादा अच्छा यह है कि उनसे बिलकुल मुक्त अनुभव करो और उनके बारे में चिंता किए बिना उन्हें अपनी राह जाने दो, जब तक कि तुम्हारें अंदर वह आवश्यक शक्ति और ज्ञान न हो जो इनके अंधकार में हस्तक्षेप करके इन्हें बदलने और परम ज्योति और चेतना कि सच्ची अभिव्यक्ति बनने के लिये इन्हें बाधित न कर दे।
संदर्भ : श्रीमाताजी के वचन (भाग-२)
श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…