भगवान की इच्छा है कि हम हमेशा ऐसी नहरें हों जो हमेशा खुली रहती हैं, हमेशा बहुत चौड़ी हों, ताकि भगवान की शक्तियाँ साँचे में प्रचुर मात्र में ढल सकें।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…