हमेशा ऐसे जियो मानों तुम ‘परम प्रभु’ तथा ‘भगवती माँ’ की दृष्टि के सामने हो। ऐसी कोई क्रिया न करो, ऐसी कोई चीज सोचने या अनुभव करने की चेष्टा मत करो जो ‘भागवत उपस्थिती’ के सम्मुख करने-योग्य न हो।
संदर्भ : माताजी के विषय में
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…