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अपने-आपको बुरा-भला कहना

क्या अपने-आपको बुरा-भला कहना प्रगति करने का अच्छा उपाय है ?

 

अपने-आपको बुरा भला-भला कहना? नहीं, जरूरी नहीं है। यह उपयोगी हो सकता है, और वास्तव में कभी-कभी तम्हारे अन्दर से पूर्णता की भ्रान्ति को निकाल बाहर करने के लिए उपयोगी होता भी है। लेकिन तुम अपनी आलोचना में बहुत ऊर्जा नष्ट करते हो। ज्यादा अच्छा यह होगा कि उसी शक्ति का उपयोग प्रगति करने में किया जाये, ठोस प्रगति कुछ अधिक उपयोगी चीज की जाये। उदाहरण के लिए, अगर तुम्हारे अन्दर अप्रिय, भद्दे, गंवारू और क्षुब्ध करने वाले विचार हों और तुम कहो : “आह, मैं भी कैसा असहाय व्यक्ति हूं, अभी तक मेरे अन्दर ऐसे विचार हैं, यह भी क्या मुसीबत है।” तो ज्यादा अच्छा यह होगा कि इस शक्ति का उपयोग तुम उन विचारों को इस तरह (संकेत) भगा देने में करो।

 

यह तो सिर्फ पहला कदम है। दूसरा है कुछ और सोचने की कोशिश करना, किसी और चीज में रस लेना : कुछ पढ़ना या मनन करना; बहरहाल, अपने मन को किसी ज्यादा रोचक चीज से भरने की कोशिश करना, अपनी शक्ति का उपयोग विनाश की जगह रचना में करना।

 

हां, समय-समय पर अपने दोष स्वीकार करने की भी जरूरत होती है; यह बिलकुल अनिवार्य है। लेकिन उन पर बहुत ज्यादा जोर देना
जरूरी नहीं है। जरूरी यह है कि अपनी समस्त शक्ति का उपयोग उन गुणों का निर्माण करने में किया जाये जिन्हें तुम अपने अन्दर चाहते हो
और जो करना चाहते हो वह करते चलो। यह बहुत ज्यादा जरूरी है।

 

सन्दर्भ : प्रश्न और उत्तर १९५३

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