समय-समय पर अंदर दृष्टि डालना तथा यह अनुभव करना कि हम कुछ नहीं है, और कुछ नहीं कर सकते सदा ही अच्छा होता है। किंतु तब हमें तुझपर भी अपनी दृष्टि डालनी चाहिए, यह जानते हुए कि तू सब कुछ है और सब कुछ कर सकता है।
तू हमारे जीवन का जीवन है और हमारी सत्ता का प्रकाश है, तू हमारी भवितव्यता का स्वामी है।
सन्दर्भ : प्रार्थना और ध्यान
अगर अपात्रता का भाव तुम्हें उमड़ती हुई कृतज्ञता से भर देता है और आनन्दातिरेक के…
कभी मत बुड़बुड़ाओ । जब तुम बुड्बुड़ाते हो तो तुम्हारे अन्दर सब तरह की शक्तियां…
अगर तुम सचेतन अभीप्सा की अवस्था में हो, बहुत सच्चे हो तो बस, तुम्हारें इर्द-गिर्द…
तुम्हें आंतरिक परिवर्तन के लिए निरन्तर अभीप्सा करनी चाहिये, तुम्हारें अंदर यह इच्छा होनी चाहिये…
जब चैत्य शरीर से विदा लेता है, अपने विश्राम-स्थल की ओर जाते हए मन और…