धरती पर जीवन तत्त्वतः प्रगति का क्षेत्र है लेकिन जो कुछ प्रगति करनी है उसके लिये जीवन कितना संक्षिप्त है!
अपनी तुच्छ कामनाओं को संतुष्ट करने में अपना समय बर्बाद करना निरी मूर्खता है । सच्चा सुख तभी मिल सकता है जब तुम भगवान् को पा लो।
सन्दर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…