अगर तुम सचेतन अभीप्सा की अवस्था में हो, बहुत सच्चे हो तो बस, तुम्हारें इर्द-गिर्द सारी चीज़ें, प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से, अभीप्सा में मदद करने के लिए सुव्यवस्थित कर दी जायेंगी, यानि, या तो तुमसे प्रगति करवाने के लिए, किसी नयी चीज़ के संपर्क में लाने के लिए, या फिर तुम्हारें स्वभाव में से किसी ऐसी चीज़ को उखाड़ फेंकने के लिए मदद करेंगी जिसे विलुप्त हो जाना चाहिये। यह काफी अपूर्व बात है। अगर तुम सचमुच अभीप्सा की तीव्रता की अवस्था में होओ तो ऐसी कोई परिस्थिति नहीं जो इस अभीप्सा को चरितार्थ करने के लिए तुम्हारी सहायता करने न आये।
संदर्भ : प्रश्न और उत्तर १९५४
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…