हर व्यक्ति अपने स्वभाव के अनुसार कार्य करता है और अगर वह साहस के साथ, सचाई से उस स्वभाव के अनुसार कार्य करे तो वह सत्य के अनुसार कार्य होगा। अतः दूसरों को जांचना या उनके लिये निर्णय करना असंभव है। तुम केवल अपने लिये जान सकते हो और इसके लिये भी तुम्हें बहुत ज्यादा सच्चा और निष्कपट होना चाहिये ताकि तुम अपने-आपको धोखा न दो।
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड – १६)
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अवतार की सम्भावना पर विश्वास करने या न करने से प्रकट तथ्य पर कोई फ़र्क़…
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भागवत चेतना की विभिन्न अवस्थाएँ होती हैं। रूपांतर की भी विभिन्न अवस्थाएँ होती है। पहली…
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