श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

दूसरों का नहीं, स्वयं का मूल्यांकन

हर व्यक्ति अपने स्वभाव के अनुसार कार्य करता है और अगर वह साहस के साथ, सचाई से उस स्वभाव के अनुसार कार्य करे तो वह सत्य के अनुसार कार्य होगा। अतः दूसरों को जांचना या उनके लिये निर्णय करना असंभव है। तुम केवल अपने लिये जान सकते हो और इसके लिये भी तुम्हें बहुत ज्यादा सच्चा और निष्कपट होना चाहिये ताकि तुम अपने-आपको धोखा न दो।

संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड – १६)

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