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आन्तरिक शांति

“साधना” करते समय बाह्य चीजों का बहुत महत्व नहीं होना चाहिये। आवश्यक आन्तरिक शांति हर तरह की परिस्थिति में स्थापित हो सकती है ।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)

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