विभिन्न मूल्य रखने वाले लोग एक साथ, सामंजस्य में कैसे रह सकते और काम कर सकते है ? इसका समाधान…
सागर के समान अपनी करुणा औ' मन्दिर की-सी नीरवता को लेकर उसकी आन्तर सहायता, सबके ही लिए द्वार अब दीव…
मधुर माँ , भगवान ने अपना मार्ग इतना कठिन क्यों बनाया है ? वे चाहें तो उसे सरल बना सकते…
हे प्रभो, प्रेम के मधुर स्वामी, तू हमें अन्धकार में से बाहर निकालता है ताकि हम चेतना की ओर जागें,…
अगर तुम उदास हो, अगर तुम अपने-आपको दुखी अनुभव करते हो, अगर तुम जो कुछ हाथ में लेते हो उसी…
सर्वदा अनुभव करो और अपने बढ़ते हुए अनुभवों के प्रकाश में कार्य करो, पर केवल तर्क-वितर्क करने वाले मस्तिष्क के…
मेरे जीवन की जीवन ! मेरी अपनी मधुरतम माँ ! मेरे प्रेम को स्वीकार करो और जैसा तुम बरसों से…
श्रीअरविंद परम पुरुष के यहाँ से धरती पर एक नयी जाति और एक नए जगत - 'अतिमानसिक '-की घोषणा करने…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती । सच्ची प्रगति है हमेशा 'भगवान' के अधिक निकट आना ।…