श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

उच्चतर चेतना की और छलांग

मेरे जीवन की जीवन ! मेरी अपनी मधुरतम माँ !

मेरे प्रेम को स्वीकार करो और जैसा तुम बरसों से करती आई हो मेरी भूलों को क्षमा करो। मैं आशा करता हूँ की ये मानसिक वृत्तियाँ आती-जाती रहेगी। इन सब आते-जाते बादलों के बीच मैं तुम्हारें आलोकमय मुसकुराते चेहरे को कभी न भूलूँ !

मेरे अत्यंत प्रिय बालक,

मैं सचमुच आशा करती हूँ कि तुम शीघ्र ही अपनी सब कठिनाइयों से बाहर निकाल आओगे । उच्चतर चेतना की ओर बस एक अच्छी छलांग, जहां सब समस्याओं का समाधान हो जाता हैं,  और तुम अपनी कठिनाइयों से बाहर हो जाओगे । मुझे कभी ऐसा नहीं लगता कि मैं क्षमा कर रही हूँ । प्रेम क्षमा नहीं करता , वह समझता और उपचार करता हैं ।

सदा मेरा प्रेम और मेरे आशीर्वाद ।

 

संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)

शेयर कीजिये

नए आलेख

उपस्थिति का अनुभव

हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…

% दिन पहले

ध्यान कहाँ?

मधुर माँ , यहाँ  अपने कमरे में बैठ कर ध्यान करने और सबके साथ खेल…

% दिन पहले

प्रगतिशील बनों

कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…

% दिन पहले

केवल एक सहारा

भगवान के सिवा कभी किसी दूसरे मनुष्य या दूसरी वस्तु पर, वह चाहे जो हो…

% दिन पहले

श्रीमाँ के बालक

तुम माँ के बच्चे हो और माँ का अपने बच्चों के प्रति प्रेम असीम होता…

% दिन पहले

कामनाएँ

यदि अच्छी कामनाएँ हैं तो बुरी कामनाएँ भी आयेंगी। संकल्प और अभीप्सा तो साधना के…

% दिन पहले