... हस्तक्षेप न करना सदा ही अधिक बुद्धिमानी की बात है-लोग बिना किसी तुक या कारण के हस्तक्षेप करते हैं,…
भगवान हृदय में देखते हैं और जब समझते हैं कि अब ठीक समय आ गया है, तब पर्दा हटा देते…
यह समझो कि तुम्हारा जीवन तुम्हें केवल भागवत कर्म के लिए और भागवत अभिव्यक्ति में सहायता देने के लिए दिया…
मैं तुम सबमें द्वार खोलने के लिए पूरा ध्यान देती हूँ, ताकि अगर तुम्हारें अंदर एकाग्रता की जरा भी गति…
आपने लिखा था, "काम में रस होना चाहिये। " लेकिन मैं पूर्ण रस या मजा नहीं ले पाता। कार्य की…
आश्रम का परिवेश, उसकी सीमाएं क्या हैं ? वह प्रत्येक घर जिसमें साधक रहते हैं आश्रम की सीमा के अंदर…
...विनम्रता पहली आवश्यकता है, क्योंकि जिसमें अहंकार और घमण्ड है वह परम या उच्चतम की सिद्धि नहीं पा सकता। संदर्भ…
यह कहा जा सकता है कि मैं पूर्णयोग कर रहा हूँ ? प्रत्येक व्यक्ति जो श्रीमाँ की ओर मुड़ा है, …
न कोई आनंद, न बल। पढ़ने-लिखने की इच्छा भी नहीं होती-मानो कोई मुर्दा आदमी चल - फिर रहा हो। आप…
अपने कर्म को पूरा करने के लिये हमारे सामने जो प्रतिरोध खड़े होते हैं वे कर्म के महत्व के अनुपात…