बदलों

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बदलो... १. घृणा को सामञ्जस्य में २. ईर्ष्या को उदारता में ३. अज्ञान को ज्ञान में ४. अन्धकार को प्रकाश…

तेरी प्रतीक्षा

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हे प्रभो, इस सत्ता में कोई चीज तुझसे कहती है : "मैं कुछ नहीं जानती, "मैं कुछ नहीं हूं, "मैं…

श्रीमाँ के साथ संपर्क

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जिन सत्ताओं का एक जीवन में आपके साथ संपर्क स्थापित हो जाता है क्या वे अपने नये जीवनों में हमेशा…

योग की शुरुआत कैसे ?

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जब मैं योग के विषय में कुछ भी नहीं जानता, यह भी नहीं जानता कि क्या करना चाहिये, तब मैं…

प्राचीन चीज़ें और पूर्ण योग

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मैं रामायण - महाभारत की कहानियों और तुलसी, कबीर, मीरा आदि के गीतों पर बहुत ज़ोर देता हूँ। क्या इन…

अपने आप को खोलो

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सच्चाई के साथ अपने-आपको खोलो। इसका अर्थ यह है की बिना अपने अंदर कुछ भी छिपाये हुए, पूरी तरह खोलो;…

नम्रता

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नम्रता चेतना की वह अवस्था है जिसमें तुम्हारी उपलब्धि चाहे जितनी क्यों न हो, तुम्हें यह भान रहता है कि…

निम्न प्रकृति और उसकी बाधाएँ

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निम्न प्रकृति तथा इसकी बाधाओं पर अधिक सोच-विचार करना भूल है क्योंकि यह साधना का नकारात्मक पहलू है। उन पर…

सुख और शांति

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सुखी और शांत होने का सबसे अच्छा उपाय है भगवान के प्रति गहराई में, तीव्रता के साथ सतत कृतज्ञता का…

अनुशासन की अनिवार्यता

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सामुदायिक जीवन में अनिवार्य रूप से अनुशासन होना चाहिये ताकि मजबूत कमजोर के साथ दुर्व्यवहार न कर सके; और जो…