अनुशासन

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अधीनस्थ कर्मचारियों को अनुशासित करना उचित मनोभाव से किया जाना चाहिये और अधीनस्थ कर्मचारीगण भी वैसा ही महसूस करें, यह…

दिव्य दृष्टि – (सॉनेट) – श्रीअरविंद की कविता

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तेरे आनन्द से अब हर दृष्टि है अमर : मेरी आत्मा सम्मोहित नयनों से करने आयी है दर्शनः फट गया…

वृद्ध होने के बारे में श्रीमां

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बड़ी उम्र में श्रीमां को दिनानुदिन अधिकाधिक फुतीला, उत्साहपूर्ण, युवा देख हमारे हृदय में उनकी वही वाणी गूंजा करती थी…

सत्ता का एकीकरण

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मधुर माँ, हम अपनी सत्ता को एक कैसे कर सकते हैं? पहला चरण है, अपने अन्दर गहराई में कामनाओं और…

सच्चे आध्यात्मिक जीवन का आरम्भ

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साधारण जीवन में लाखों में से एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं होता जिसका अपनी चैत्य चेतना के साथ सचेतन सम्पर्क…

श्रीमां का स्पर्श

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जब तुम अपने-आपको देते हो तो पूरी तरह दो, बिना किसी मांग के, बिना किसी शर्त के और बिना किसी…

योग का कार्य

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सभी धर्म इस धारणा से आरम्भ होते हैं कि हमारे सीमित और मरणशील व्यक्तित्वों से महत्तर और उच्चतर कोई शक्ति…

देश की कठिनाई

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देश को कठिनाई से उबारने के लिए क्या करना चाहिये? श्रीअरविन्द ने सभी मुश्किलों को पहले से ही देख लिया…

सत्य क्या है

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एक पन्द्रह वर्ष की लड़की ने पूछा, "सत्य क्या है?" मैंने उत्तर दिया, “परम प्रभु की इच्छा।" यह चिन्तनात्मक ध्यान…

बदलों

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बदलो... १. घृणा को सामञ्जस्य में २. ईर्ष्या को उदारता में ३. अज्ञान को ज्ञान में ४. अन्धकार को प्रकाश…