श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

तेरी प्रतीक्षा

हे प्रभो, इस सत्ता में कोई चीज तुझसे कहती है :
“मैं कुछ नहीं जानती,
“मैं कुछ नहीं हूं,
“मैं कुछ नहीं कर सकती,
“मैं निश्चेतना के अंधेरे में हूं।”

और कोई और चीज है जो जानती है कि वह स्वयं ‘तू’ है और इस तरह परम पूर्णता है। इसमें से क्या परिणाम निकलने वाला है? ऐसी अवस्था का अन्त कैसे आयेगा? यह जड़ता है या सच्चा धैर्य, यह मुझे
नहीं मालूम; लेकिन बिना जल्दबाजी और बिना कामना के मैं तेरे चरणों में नत हूं और प्रतीक्षा कर रही हूं।

संदर्भ : प्रार्थना और ध्यान 

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