मैं रामायण – महाभारत की कहानियों और तुलसी, कबीर, मीरा आदि के गीतों पर बहुत ज़ोर देता हूँ। क्या इन प्राचीन चीजों को जारी रखना आपके मार्ग के विपरीत है ?
हर्गिज नहीं – महत्व मनोवृत्ति का है। भूत को भविष्य की ओर उछलने का तख़्ता होना चाहिये, प्रगति को रोकने वाली जंजीर नहीं। जैसा कि मैंने कहा है, सब कुछ भूतकाल कीओर तुम्हारी मनोवृत्ति पर निर्भर करता है ।
संदर्भ : पथ पर
भगवान के प्रति पूर्ण आत्म-दान के लिए तीन विशेष विधियाँ : (१) सारे गर्व को…
श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…