श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

स्थिरता और तमस

स्थिरता और तमस में घपला मत करो। स्थिरता है, आत्म-संयत शक्ति, अचंचल और सचेतन ऊर्जा, आवेशों पर प्रभुत्व और अचेतन प्रतिक्रियाओं पर नियंत्रण। कार्य में स्थिरता निपुणता का मूल और पूर्णता की अनिवार्य शर्त है ।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)

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