जब तक तुम्हारें अन्दर धरती को बदलने की शक्ति न हो तब तक यह कहना बेकार है कि दुनिया ठीक नहीं हैं । और अगर तुम अपने अन्दर से उन चीज़ों को दूर कर दो जो दुनिया में ग़लत हैं तो तुम देखोगे की दुनिया भी ग़लत न रही ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…