मेरी प्यारी माँ,
मेरा हृदय तुम्हारें चरणों की ओर दौड़ना चाहता है और अपने-आपको तुम्हारे अन्दर खो देना चाहता है । मैं यही चाहता हूँ, लेकिन क्या मैंने यह कर लिया है ? मैं तुम्हारे हृदय के निकट होना चाहता हूँ, मैं चाहता हूँ … पर क्या यह संभव है ? मुझे पता नहीं ?
मुझे शांत करो, मुझे अपनी दिव्य उपस्थिती का रस प्रदान करो ।
हाँ, मेरे प्यारे बच्चे, यह पूरी तरह सम्भव है और चूंकि तुम सच्चाई के साथ यह चाहते हो इसलिए ऐसा हो जायेगा। तुम अपने-आपको हमेशा मेरे हृदय के निकट, मेरी भुजाओं में झूलते हुए अनुभव करोगे। और शांति तुम्हारी सत्ता को भर देगी और तुम्हें मजबूत और आनन्दपूर्ण बनायेगी ।
तुम्हारी माँ की ओर से प्यार।
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१७)
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