जिस प्रकार किसी तारे का प्रकाश उस तारे के मिट जाने के सैकड़ों वर्ष बाद पृथ्वी पर पहुंचता है, उसी तरह जो घटना आदिकाल में ब्रह्म के अंदर पहले ही पूर्ण हो चुकी थी वह अब हमारे भौतिक अनुभव में अभिव्यक्त होती है ।
संदर्भ : विचारमाला और सूत्रावली
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