जिस प्रकार किसी तारे का प्रकाश उस तारे के मिट जाने के सैकड़ों वर्ष बाद पृथ्वी पर पहुंचता है, उसी तरह जो घटना आदिकाल में ब्रह्म के अंदर पहले ही पूर्ण हो चुकी थी वह अब हमारे भौतिक अनुभव में अभिव्यक्त होती है ।
संदर्भ : विचारमाला और सूत्रावली
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…