मधुर माँ,
हम अपने मन को सब विचारों से खली कैसे कर सकते हैं? जब हम ध्यान में इसके लिए प्रयास करते हैं तो हमेशा यह ख्याल बना रहता कि हमें कुछ नहीं सोचना चाहिये।
तुम्हें ध्यान के समय चुप रहना नहीं सीखना चाहिये, क्योंकि प्रयास का प्रयत्न अपने-आप शोर मचाता है।
तुम्हें अपनी ऊर्जाओं को हृदय में केंद्रित करना सीखना चाहिये । जब उसमें सफलता मिल जाये तो नीरवता अपने-आप आ जाती है।
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड – १६)
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…
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