मेरे प्यारे बालक,
तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने, तुम्हारी रक्षा करने, तुम्हें बल और प्रकाश देने के लिये अपने हृदय के पास रखती हूं। मैं तुम्हें कभी एक क्षण के लिये भी नहीं छोड़ती और मुझे विश्वास है कि अगर तुम जरा सावधान रहो तो तुम स्पष्ट रूप से अपने कंधों के चारों ओर मेरी भुजाओं की ऊष्मा का अनुभव कर सकोगे।
तुम्हारी मां।
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…
जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…
हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर 'अनन्तता' के…