मेरे प्यारे बालक,
तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने, तुम्हारी रक्षा करने, तुम्हें बल और प्रकाश देने के लिये अपने हृदय के पास रखती हूं। मैं तुम्हें कभी एक क्षण के लिये भी नहीं छोड़ती और मुझे विश्वास है कि अगर तुम जरा सावधान रहो तो तुम स्पष्ट रूप से अपने कंधों के चारों ओर मेरी भुजाओं की ऊष्मा का अनुभव कर सकोगे।
तुम्हारी मां।
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…