मेरे प्यारे बालक,
तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने, तुम्हारी रक्षा करने, तुम्हें बल और प्रकाश देने के लिये अपने हृदय के पास रखती हूं। मैं तुम्हें कभी एक क्षण के लिये भी नहीं छोड़ती और मुझे विश्वास है कि अगर तुम जरा सावधान रहो तो तुम स्पष्ट रूप से अपने कंधों के चारों ओर मेरी भुजाओं की ऊष्मा का अनुभव कर सकोगे।
तुम्हारी मां।
क्या अपने-आपको बुरा-भला कहना प्रगति करने का अच्छा उपाय है ? अपने-आपको बुरा भला-भला…
मधुर माँ, हम स्वप्न में अच्छे और बुरे में कैसे फ़र्क़ कर सकते हैं। सिद्धांत…
(अधिकतर साधक) अहंकारी होते हैं और वे अपने अहंभाव को अनुभव या स्वीकार नहीं करते।…