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दोष देखना

एक साधक स्वभाव से उदार और दूसरों पर विश्वास करने वाला था । कुछ बेईमान लोग बार-बार उसकी भलाई का अनुचित लाभ उठाया करते थे । माताजी ने उसकी हालत देखकर और शायद उसकी विचारधारा को पढ़कर कहा, ‘कभी कटु और दोषदर्शी न बनो, विश्वास को हाथ से न जाने दो । ऐसा करने से दुनिया शायद तुम्हें बुद्धिमान कहें, पर आध्यात्मिक दृष्टि से तुम्हारी मौत ही हो जायेगी । ‘

संदर्भ : माताजी की झाँकियाँ 

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