अपने अन्तर में हम सतत एक जादुई चाबी छिपाये रहते हैं
यह जीवन के प्राण-रुद्ध एक खोल में बन्द है।
संदर्भ : “सावित्री”
मैं तुम्हें अपना पुराना मन्त्र बताती हूं; यह बाह्य सत्ता को बहुत शान्त रखता है…
अगर अपात्रता का भाव तुम्हें उमड़ती हुई कृतज्ञता से भर देता है और आनन्दातिरेक के…
कभी मत बुड़बुड़ाओ । जब तुम बुड्बुड़ाते हो तो तुम्हारे अन्दर सब तरह की शक्तियां…