प्यारी माँ ,
मुझ गरीब के लिए आपका प्यार अब भी मेरा ध्रुवतारा है और मैं उसके लिए कृतज्ञ हूँ ।
मेरे प्यार बालक,
मेरा प्रेम तुम्हें लक्ष्य तक ले जाना चाहता है और उसकी विजय निश्चित है । मेरे आशीर्वाद के साथ।
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड- १६)
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