प्यारी माँ ,
मुझ गरीब के लिए आपका प्यार अब भी मेरा ध्रुवतारा है और मैं उसके लिए कृतज्ञ हूँ ।
मेरे प्यार बालक,
मेरा प्रेम तुम्हें लक्ष्य तक ले जाना चाहता है और उसकी विजय निश्चित है । मेरे आशीर्वाद के साथ।
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड- १६)
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…
जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…
हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर 'अनन्तता' के…