मेरा प्रेम


श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ

प्यारी माँ ,

मुझ गरीब के लिए आपका प्यार अब भी मेरा ध्रुवतारा है और मैं उसके लिए कृतज्ञ हूँ ।

 

मेरे प्यार बालक,

मेरा प्रेम तुम्हें लक्ष्य तक ले जाना चाहता है और उसकी विजय निश्चित है । मेरे आशीर्वाद के साथ।

 

संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड- १६)


0 Comments