शारीरिक कठिनाइयां हमेशा समता सिखाने के पाठ के रूप में आती हैं और यह प्रकट करती हैं कि हमारे अन्दर इतने पर्याप्त रूप में क्या शुभ और प्रकाशमय है जिस पर इन चीजों का कोई असर न पड़े। हम समता में ही उपचार पाते हैं ।
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि समता का अर्थ उदासी न होना चाहिये।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…