भागवत संकल्प को जानने के लिये यह जरुरी है कि मन शान्त हो। शान्त मन में ही – जो भगवान की और मुड़ा हो – भगवान का संकल्प अन्तर्भासित (उच्चतर मन से) होता है, और उसे करने का ठीक तरीका भी तभी आता है।
सन्दर्भ :श्रीअरविन्द के पत्र
भूल या सजा देने का कोई प्रश्न ही नहीं है-अगर लोगों को हम उनकी भूलों…
इन छोटी-छोटी बातों से क्यों उत्तेजित हो जाते हो? या उनसे अपने को क्यों विचलित…
जो श्रद्धा वैश्व भगवान के प्रति जाती है वह लीला की आवश्यकताओं के कारण अपनी…
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