मन की संकीर्णता से प्रेम करने का क्या तात्पर्य है?
लोग संकीर्ण रहना पसन्द करते हैं; वे उनके अपने सीमित विचारों, भावनाओं, मतों, रुचियों से चिपके रहते हैं और अगर कोई यह कोशिश
करे कि वे अधिक व्यापक रूप से सोच सकें तो वे विक्षुब्ध हो उठते हैं, नाराज़ हो जाते हैं और शंका से भर जाते हैं-इसे कहते हैं मन की
संकीर्णता से प्रेम करना।
संदर्भ : योग के तत्व
जीवनयात्रा में समस्त भय, संकट और विपदा का सामना करने के लिए कवच के रूप…
अपने तुच्छ, स्वार्थपूर्ण व्यक्तित्व से बाहर निकलो ओर अपनी भारतमाता के योग्य शिशु बनो ।…
सारी समस्या का निचोड़ यह है : बुद्धि के मानसिक प्रशासन की जगह आध्यात्मिक चेतना…