प्र) मैं अपने चारों तरफ बादल ही बादल देख रहा हूँ जो मुझ तक आपके प्रकाश को आने नहीं दे रहें । आपकी उपस्थिती का मैं दुबारा किस तरह अनुभव कर सकता हूँ ।
उ) पहली शर्त है अपने मन को स्थिर और शांत रखना । स्थिरता में ही प्रकाश का अवतरण हो सकता है ।
संदर्भ : मातृवाणी (खंड-१७)
तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…
अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…
तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…
श्रीअरविंद ने कितनी ही बार इस बात को दोहराया है कि परमात्मा हास्यप्रिय हैं और…